कबीर के श्लोक - ७
कबीर दीनु गवाइआ दुनी सिउ,दुनी न चाली साथि॥
पाइ कुहाड़ा मारिआ, गाफिल अपनै हाथि॥१३॥ कबीर जी इस श्लोक मे कहते है कि हम सदा दुनिया दारी में ही लगे रहते है,जिस कारण हम जिस काम के लिए दुनिया मे आए हैं,वही भूल जाते हैं और दुनिया दारी में ही रम जाते हैं।जबकि हम...
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परमजीत बाली
अध्यात्मिक
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[28 Jan 2010 21:04 PM]



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