मेरे अवगुन चित न धरो...

ढाई घर जब, उन्होंने अपने मंत्री मंडल का विस्तार किया । तो विपक्षियों ने कहा कि, ‘‘सभी दागियों-बागियों को वापस बुला लिया है।’’ मुझे बहुत बुरा लगा । वे भी तो कभी सत्ता में रहे हैं। क्या ‘हम्माम’ में, मैं ही कपड़े पहने खड़ा रहूँ ?! वैसे भी, हमारी पार्टी में जो भी... [पूरी पोस्ट]
writer Dhaighar

व्यंग्य

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[28 Jan 2010 11:49 AM]

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