गजलों के मौसम
गजलों के मौसम हमने भी देखे हैख्वाब गुलाबी से हमने भी देखे हैंपर मौसम तो मौसम है बदलेगा हीसावन और पतझड़ हमने भी देखे हैंजब ठंडी ठंडी सी लगती थी गर्मीजब चुभ जाती थी फूलों की भी नरमीचाँद झांक खिड़की से करता बेशर्मीवो रेशम से दिन हमने भी देखे हैंजब पाया क्या...
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ranjana
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[28 Jan 2010 15:28 PM]



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