आओ न

दर्पण आओ नआना है तो आओ न,यूँ दिल को जलाओ न छोटी किसी बात पर,यूँ दिल को तड़पाओ न हसरतों के तुफाँ में,अकेला ये मुसाफिर तन्हाई की आग़ोश में,गुम हुआ आज फिर क्या है दिल में साथी,हमें कुछ बताओ न छोटी किसी बात पर,यूँ दिल को तड़पाओ नतेरी ख़ामोशियां जैसे,रूठी हो बहार भी लब... [पूरी पोस्ट]
writer SURINDER RATTI

आओ न

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[28 Jan 2009 06:10 AM]

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