परिचित

दर्पण परिचित एक ढून्ढो हज़ार मिलते हैं,दिल तोड़नें वाले सब यार मिलते हैं,जानें क्या सुकून मिलता है उनको,बड़े नसीब से वफादार मिलते हैं,हमारा बोलना, हंसना, कुछ भी गवारा नहीं,जानें किस मकसद से, मेरे पीछे चलते हैं,बैर ही बसता है बस उनके दिलों मेंमोहबत के अफसानें... [पूरी पोस्ट]
writer SURINDER RATTI

परिचित

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[25 Feb 2009 04:25 AM]

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