अधमरा

दर्पण अधमरामैं वो गुल हूँजो खिला भी और नहीं भी ज़िन्दा भी और नहीं भीजो भी आयानोचनेंवाला, मरोड़नेवाला, दिन-रात ज़हर घोलनेवाला,दरियादिल, नेकदिल इंसान मिला भी और नहीं भीउसनें क़सम खायी सितम ढाने की, मुझे डुबाने की बहुत कोशिशें की, जिंदा लाश बनाने कीख़ुदा का शुक्र है,... [पूरी पोस्ट]
writer SURINDER RATTI

अधमरा

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[05 May 2009 02:48 AM]