इंतज़ार है

दर्पण इंतज़ार है चान्दनी ख़ुबसूरत, गले मोतियों का हार हैसज-धज के निकली, नयी-नयी बहार हैचमके माथे की बिंदिया, झूमें कानों के झुमके, चेहरा भी खिला-खिला, सुन्दर सिंगार हैमहक रहा है तन-बदन, नाज़ का निशाँ नहीं,रोम-रोम से बरस रहा, प्यार ही प्यार हैदिल चीज़ है ऐसी,... [पूरी पोस्ट]
writer SURINDER RATTI

इंतज़ार है

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[06 May 2009 05:21 AM]

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