भोला बचपन

दर्पण भोला बचपन आज़ादी के बाद भी, इन्कलाब न हो सका,हमारे बच्चों के वास्ते, एहतसाब न हो सका मासूम भला क्या जानें, हयात की दुशवारियाँ,कलम, दवात, किताब का, हिसाब न हो सका एक मासूमियत ही, झलकती चेहरे पे,किसी हरे-भरे चमन का, गुलाब न हो सका ज़िन्दगी तीरगी में, क्या... [पूरी पोस्ट]
writer SURINDER RATTI

कविता

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[04 Jun 2009 02:00 AM]

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