दिनचर्या

दर्पण दिनचर्या चिड़ियों की चूँ-चूँ ने आभास कराया, भोर हो गयी है। भास्कर आँगन में आ गया है, अरे आज फिर देर हो गयी जैसे-तैसे स्नान करके तैयार हो जलपान ग्रहण किया और सड़क पर सरपट दौड़ लगायी, बस पकड़नें की। हाँफते-हाँफते जान गले में अटक गयी किसी तरह दफ्तर पहुंचा ।... [पूरी पोस्ट]
writer SURINDER RATTI

लघु कथा

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[04 Jun 2009 03:08 AM]

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