नेक दिल
नेक दिलवो शमां जली के न जली,पर रात ढलीअन्धेरों में सिमटी,यादों की गलीमैंने लाख मनाया उसे,मेरी एक न चलीज़ुबां तल्ख़ तो कभी,मिसरी की डलीजैसी भी है "रत्ती"वो नेकदिल भली...
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SURINDER RATTI
नज़्म
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[19 Aug 2009 02:30 AM]



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