बेरंग
बेरंगइस रंगीन दुनियाँ में,ज़िन्दगी बेरंग है,ये कैसा अजूबा है मौला,हर शख्स तंग हैमायुसी है के बस,सर उठाने नहीं देती,क़दम-क़दम पे लड़ाई,हर काम में जंग हैहुस्न और दौलतवालों को,दावत के पैग़ाम मिले,सिमटा दायरा प्यार का,अपनी-अपनी पसंद हैफौलाद की बेड़ियाँ टूट...
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SURINDER RATTI
नज़्म
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[07 Sep 2009 07:36 AM]



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