हयात
हयात थोड़ा-थोड़ा जीता हूँ ज़रा-ज़रा मरता हूँ,ग़मों की आग में सुलगता हूँ जलता हूँ ख़ुश्क अरमां हैं दम-खम भी नहीं बचा,बेसाख्ता मिज़ाज न बिगड़े संभलता हूँहयात में तंदखू-ओ-बरहम भी मिले,उलझ न जाऊँ किसी से मैं डरता हूँ ख़ुद-परस्ती का शोर-गुल कानों में पड़ा,कशमकश में...
[पूरी पोस्ट]
SURINDER RATTI
नज़्म
5
0
0
0
0
[06 Sep 2009 14:08 PM]



Shuffle








