दहर
दहर राह-ए-दहर में बातों के, फसानें थे बहोत काली रातों में दिल में, अफ़साने थे बहोत मेरी मौजूदगी में जो, कतराते रहते थे,जाने के ...
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SURINDER RATTI
नज़्म
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[05 Jan 2010 06:39 AM]



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