चाँद पर बादल, घनेरा हो गया
चाँद पर बादल, घनेरा हो गया कौन था क्यूँकर, वो मेरा हो गयाआरजूओं का, सवेरा हो गयाधडकनों में आ गया, तूफ़ान-सादिल में ये किसका, बसेरा हो गयाहाल मेरा देख, सब पूछें हैं क्यूँ ?बात क्या है? कौन तेरा हो गया?दर्द का अहसास भी होने लगाराम जाने, क्या बखेड़ा हो...
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योगेश स्वप्न
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[28 Jan 2010 11:01 AM]



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