जन गण मन की दुर्दशा !!!

अनकही जन गण मनके अधिनायक हे भारत भाग्य विधाता ।तेरी दशा दुर्दशा पर अब नहीं कोई शरमाता । । गदारोंसे पटा पडा है देस का कोना कोना ।हंसी और किलकारी गुम हुई बचा सिर्फ अब रोना ॥उसका यहाँ सम्मान हो रहा जो करता अपमानित । वहीँ यहाँ पूजा जाता जो तुझ पर दाग लगता ॥ जन मन... [पूरी पोस्ट]
writer रजनीश के झा (Rajneesh K Jha)
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[28 Jan 2010 11:03 AM]

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