इसे मान लेना तुम बेशक अंतिम इच्छा मेरी

दर्पण के टुकड़े इसे मान लेना तुम बेशक अंतिम इच्छा मेरीमरू तो हाथो में रख देना तस्वीर कोई इक तेरीइसके बाद इक रोज़ खुदा से अपनी मुलाक़ात होगी शिकवे शिकायत होंगे आमने सामने हर बात होगीआखिर में पूछे गा खुदा अब बता क्या मर्ज़ी है तेरीकहूंगा मैं कि मेरे खुदा बस इतनी अर्ज़ है... [पूरी पोस्ट]
writer Krishan lal "krishan"
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[28 Jan 2010 09:32 AM]

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