Tamanna
अंजुरियों में भर लेती हूँदेखती हूँ,मुस्कुराती हूँ,जाने क्या कहते हैं?जाने क्या सुन जाती हूँ.कभी घबराकर,कभी शरमाकर,छुपा देती हूँ इनके बीच चेहरा'अपना' चिपक जातें हैं पेशानी से लबों तक,'अक्स', 'खुशबू''सिमटना',' बिखरना''राख' और 'ख्वाब''अजीज',...
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Sonalika
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[28 Jan 2010 05:42 AM]



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