बस नजरों भर आकाश

पुनश्च भगाने कोमन का अंधकार,काफी है एक टिमटिमाता दीया!पलटकर एक नजरदेखना उनकाजोड़ जाता है जिया! मु_ी भर सकून,नजरो भर आकाश,आंचल में लंू समेटबस इतना दो प्यार!टूटे नहीं लय-छंद,दास्तां नहीं यहहार-जीत की,चाहत बस इतनी सीजीवन मेंकविता रहे बरकरार!... [पूरी पोस्ट]
writer chetna
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[28 Jan 2010 04:09 AM]

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