आपसे बढ़कर भी बला है ! (ग़ालिब)

मिर्ज़ा ग़ालिब एक बार की बात है कि जिस मकान में ग़ालिब रहते थे , उसमें कई सारी समस्याएं थीं इसीलिए तकलीफ़ थी । वे इसीलिए मकान बदलना चाहते थे । एक दिन वे खुद एक मकान देखकर आये । उसका बैठकखाना तो पसंद आ गया पर जल्दी में अन्तःपुरवाला हिस्सा न देख सके । फिर उन्होंने यह भी... [पूरी पोस्ट]
writer अनिल कान्त :

Mirza Ghalib

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[28 Jan 2010 03:37 AM]

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