कुछ पाती एक शाम के नाम
हां, मैं उदास हंू,तन्हाइयों के पास हंू।दूर तकविस्तार है,अंतहीनआकार है,चांद-तारों बिनामैं आकाश हंू।हां, मैं उदास हंू।बंजरजमीन है,नभनीर हीन है,बिखरे बीज कामैं प्रयास हंू।हां, मैं उदास हंू।...
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chetna
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[28 Jan 2010 03:20 AM]



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