कुछ क्षणिकायें - अवनीश तिवारी
बचपन१.सिर मेरा गोद में ले ,देर तक जुयें निकालती रही ,माँ |२.हर शाम ,टाइम टेबल देख,मेरा बस्ता लगाती,माँ |बदलाव३.शोपिंग माल से झिझक ,उसी पुराने बाजार में,टहलती - खरीदती,माँ |४.मोबाइल के जटिल बटनों में फंसी,गलत नंबर मिलाती ,माँ |समर्पण५ .एक बार कहा आज ठण्ड...
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कविता
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[28 Jan 2010 02:30 AM]



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