कुछ क्षणिकायें - अवनीश तिवारी

साहित्य शिल्पी बचपन१.सिर मेरा गोद में ले ,देर तक जुयें निकालती रही ,माँ |२.हर शाम ,टाइम टेबल देख,मेरा बस्ता लगाती,माँ |बदलाव३.शोपिंग माल से झिझक ,उसी पुराने बाजार में,टहलती - खरीदती,माँ |४.मोबाइल के जटिल बटनों में फंसी,गलत नंबर मिलाती ,माँ |समर्पण५ .एक बार कहा आज ठण्ड... [पूरी पोस्ट]
writer साहित्य-शिल्पी

कविता

views
29
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
8
[28 Jan 2010 02:30 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix