अदब से बात अदब की
लगभग हर नियमित दर्शक-श्रोता की स्मृति में कोई ना कोई सत्र सकारात्मक रूप से अंकित ना हुआ हो, किसी न किसी लेखक से संवाद, दर्शन या पास में बैठने का अनुभव गौरवमिश्रित खुशी का वाइज नहीं बना हो, ऐसा मुझे नहीं लगता, तो क्या इसे कम बड़ी जमीनी उपलब्धि माना जाना...
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DUSHYANT
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[28 Jan 2010 00:43 AM]



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