मेरे न रहने पर
मेरे न रहने परखिड़की पर चाँद अटक जायेगाकमरे में रौशनी छिटका करेगीकुछ न कुछ चमक रहा होगामेज़ पर बिखरे पन्नेफर्श पर खिलौनेटिफिन तैयार कर स्त्री पति को सौंपेगीसमय पर खा लेने की ताकीद के साथहर पुरुष की पत्नी और प्रेमिकाविश्व की सबसे सुन्दर कृति होगीदेह बिना...
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शहरोज़
कविता
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[28 Jan 2010 01:17 AM]



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