अभी तक आदमी बनकर तुम्हे जीना नहीं आया..........
खुशी हद से बढ़ी तो आ गए मुस्कान को आंसूकहीं कोई लुटा तो आ गये ईमान को आंसूचढ़ाकर लूट की संपत्ति तुमनें जीत माँगी तोपुजारी मुस्कराया आ गये भगवान को आंसू । पराई पीर का प्याला तुम्हे पीना नहीं आयामनुजता का फटा आंचल तुम्हे सीना नहीं आयाभले ही तुम फरिश्तों की...
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डॉ. मनोज मिश्र
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[27 Jan 2010 21:53 PM]



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