जीने दो मुझे (कन्या भ्रूण-हत्या )

काव्य तरंग जीने दो मुझे, मैं भी जिंदा हूँक्या दोष मेरा ? हूँ मैं अंश तेराऐसे समाज पर, मैं बहुत शर्मिंदा हूँ !!कहलाती पराई सदा ही रही जन्म मिला तो, मृत्यु सी पीर सही हैवानो मुझ पर दया करो ना कुक्ष में कुचलो हया करो !!अमानवीयता से, सदा मैं हार रही सुन बिलख-बिलख कर,... [पूरी पोस्ट]
writer RaniVishal

जीने दो मुझे

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[27 Jan 2010 20:01 PM]

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