नहीं लडूंगा अब अकेले....

अपना पंचू समाज क्या होता है? क्यों समाज में उठना-बैठना चाहिए? क्यों एकांकी जीवन सदा आनंददायक नहीं होता? दो-तीन दिन में सही अर्थ समझा इन बातों का। हमारे बुजुर्ग जो भी कह गए हैं सौ फीसदी सही कह गए हैं। उन्होंने यूं ही धूप में बाल सफेद नहीं किए थे मान गए गुरू। अब... [पूरी पोस्ट]
writer lokendra singh rajput

यादें

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[27 Jan 2010 12:14 PM]

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