दर्द बेचने निकले हैं श्री पंकज सुबीर, कौन है जो मोल लेगा ? और सुनिये एक गज़ल-सजायें दी है मुझे उसने मुस्कुराने पर

कुछ शब्द मित्रों, आज की महफ़िल में आपका स्वागत है। आज विशेष तौर आपके लिये गुरूदेव श्री पंकज सुबीर जी के स्वर में उन्ही का गीत "दर्द बेचता हूं मैं" । और साथ में सुनिये मेरी एक गज़ल जिसे उदारतापूर्वक गुरूदेव ने अपनी आवाज दी है।दर्द के इस गीत के लिये दादा गोपालदास... [पूरी पोस्ट]
writer रविकांत पाण्डेय
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[27 Jan 2010 11:42 AM]

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