युवाओं को संवदेना विहीन बनाती है रैगिंग!
रैगिंग पाश्चात्य जीवन शैली की कुछ अत्यंत बुरी बुराइयों में से है, जिसे भारतीयों ने कुछ अन्य बुराईयों की तरहजबर्दस्ती ओढ़ लिया है। यह अपने आप में इतनी बुरी है कि हम विगत कई वर्षों से प्रयास करने के उपरांत भी इसेमहाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों से समाप्त...
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Mohanlal Gupta
samaj
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[27 Jan 2010 11:10 AM]



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