मुझे मेरे बेटे ने बाहों में भर कर.......
इन दिनों ब्लागिंग के लिये अधिक समय नहीं दे पा रहा हूं. समस्त ब्लागर जगत उदारता से क्षमा करे.इस बीच भाई सुबीर जी के आदेश पर कुछ शेर निकल आये थे. जिस दिन टाइप कर के उन्हें भेजने बैठा तो कम्बख्त लाइट चली गई. तो जितने शेर वहां चले गये सो चले गये शेष यहीं रह...
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योगेन्द्र मौदगिल
ग़ज़ल
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[27 Jan 2010 10:33 AM]



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