बाँट लो अपना घरौंदा
फायदा क्या साथ रहने में,यहाँ फिर बे-सबब |जब लगे बर्तन खनकने,यार हो जाओ अलग |जब सिर्फ अपनी बात ही,सबको सही लगने लगे|बाँट लो अपना घरौंदा,ताकि हंस कर मिल सके |बात एक दूजे कि जब,कान में चुभने लगे,मौन ब्रत धर लो वहां,ताकि सुकून से...
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Tapashwani Anand
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[27 Jan 2010 08:09 AM]



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