मेरा तुम्हारा क्षितिज
मेरी,कुछ अपनी क्षमता थी / कुछ अपना नज़रिया / और कुछ आकलन तुमसे जुड़ने के बाद मुझे लगा था किमैं,कर पाऊंगा विस्तार अपनी सीमाओं का और व्यापक / पैनी / समग्र तुममेरे विचारों को मार रहे हो गर्भ में हीजहाँ वो आकार लेते रहे थे और अपने नज़रिये को थोप रहे हो मैं,यह...
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मुकेश कुमार तिवारी
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[27 Jan 2010 04:14 AM]



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