मेरा तुम्हारा क्षितिज

कवितायन मेरी,कुछ अपनी क्षमता थी / कुछ अपना नज़रिया / और कुछ आकलन तुमसे जुड़ने के बाद मुझे लगा था किमैं,कर पाऊंगा विस्तार अपनी सीमाओं का और व्यापक / पैनी / समग्र तुममेरे विचारों को मार रहे हो गर्भ में हीजहाँ वो आकार लेते रहे थे और अपने नज़रिये को थोप रहे हो मैं,यह... [पूरी पोस्ट]
writer मुकेश कुमार तिवारी
views
19
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
10
[27 Jan 2010 04:14 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix