९१ कोजी होम

भंगार गुलज़ार साहब , मुझे बूढ़े सन७३ में भी लगते थे । क्यों ? मुझे नहीं मालूमवक्त बीतता गया आज भी वैसे ही हैं ,वजह ....मुझे नहीं मालूम । जैसे बचपनेसे सीधे बुढ़ापे में आ गये , वैसे भी ,उन्हें बुढ़ापे से ज्यादा प्यार है ,आप को उनकीफिल्मों से ही पता चल जाएगा ,उनका... [पूरी पोस्ट]
writer भंगार

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[27 Jan 2010 02:41 AM]

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