स्वतन्त्रता-रवि [कविता] - प्रदीप भारद्वाज “कवि”
स्वतंत्रता अम्बर में जो रवि का प्रकाश है .वो भारती, प्रभावती का सुत सुभाष है.वो देश-भक्ति भावना का गहरा सिन्धु था.माँ भारती की वीरता का मान बिंदु था.नरपुंगवों का शौर्य था वीरों का जोश था.शंख पाञ्चजन्य का वो क्रांति-घोष था.अंग्रेजी राज का किया जिसने विनाश...
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[27 Jan 2010 02:30 AM]



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