शुक्रगुज़ार हूँ मैं
अरी जनवरी ! मैं जानती हूँ कि बड़े लोगों पर तेरा बस नहीं चलता है, इसीलिए तू हर बार की तरह इस बार भी मुझे कंपकंपाने के लिए आ ही गई. लेकिन इस बार तो तुम्हारा आना सबको वरी कर गया, तुम्हारे आगे बसंत की तक दाल नहीं गली . लेकिन जनवरी ! मैं तो बिना जाड़े के यूँ...
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Shefali Pande
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[26 Jan 2010 20:34 PM]



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