खोए बच्चों के नाम
एक चिठ्ठी मैं लिखना चाहता हूँ खोए बच्चों के नामशहतूत की टहनियों से टँगेछोटे होते जाते हैं उनके कपड़ेफैलती हैं टहनियाँघना होता जाता है शहतूतऔर सालों में कभी एक बार मैं बूढ़े पेड़ को देखता हूँअपनी छाया पर झुके हुए,तार-तार होते जाते हैं कपड़ेउनकी स्मृतियाँ...
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मोहन राणा - Mohan Rana
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[26 Jan 2010 17:33 PM]



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