बीता हुआ कल...

जीवन के पदचिन्ह बीता हुआ कल, मिल जाये कहीं, किसी मोड़ पर बढ़ जाना तुम हँसकर, सिसकता उसे छोड़करन सुनना उसकी कोई दिलकश कहानीन बहाना आँखों से दो बूँद पानी ...कसकर थामना तुम... [पूरी पोस्ट]
writer Sudhir (सुधीर)

दर्द

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[26 Jan 2010 14:00 PM]

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