हिमालय में हैंड ग्लाइडिंग, नहीं पहाड़ में हिचकोले खाती जिंदगानी हरदम
3 जल जीवन की अनंत काया (मंडी के पुराने शहर की बावड़ी पर दिल कुर्बान) एक खींचकर लाई पहाड़ों की जड़ों से बहाई सदियों से अजस्र जलधार हद बाहर रहे आए कुएं बाबड़ियां नगर हुआ बेहद्द कुछ इस तरह गलियों मकानों छज्जे चौबारों के बीच ला बिठाई बावली पुरानी एक एक सीढ़ी...
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anup
कविता
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[26 Jan 2010 08:32 AM]



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