समय व असमय की सार्थकता......
समय व असमय की सार्थकता द्वन्दात्मक रूप मेंक्षण-प्रतिक्षणउकेरना आरंभ कर देते हैंहर रंग को बारी-बारी सेअतीत की घटी घटनाओं मेंठीक वैसे हीजैसेकोई व्याख्याताप्रस्तुत कर रहा हो..शोधपरक पत्र.....!सरकते हुए विगत मेंदर्ज होना कौन नहीं चाहेगापरिस्थितिजन्य...
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हेमन्त कुमार
कविता
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[26 Jan 2010 07:00 AM]



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