इमरोज ......इक लोकगीत सा

मेरे आस-पास एक साया जो सपने में उतरने लगा था....कुछ पहचान नहीं आ रही थी कि किसका साया है। दिखायी देता है कि एक अकेला मकान है, आसपास में कोई बस्ती नहीं है.....उस मकान की दूसरी मंजिल पर एक खिड़की है जिसमें कोई खड़ा है कंधों पर ‘ााल डाल कर। खिड़की के पास रखी मेज पर बड़ा सा... [पूरी पोस्ट]
writer MANVINDER BHIMBER
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[26 Jan 2010 06:20 AM]

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