ऐ गणतंत्र तुझे सलाम!
आज़ाद भारत के ६१ वे गणतंत्र के दिन मुझे इकबाल की कुछ पंक्तियाँ याद आ रही हैं जो हिंदुस्तान के इतिहास मेंस्वरानाक्षरों में कही जाती हैं। सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्तां हमाराहम बुलबुलें हैं इसकी, यह गुलिसतां हमारा गुरबत में हों अगर हम, रहता है दिल वतन...
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पियूष अग्रवाल
गणतंत्र दिवस
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[26 Jan 2010 05:41 AM]



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