चीत्कार उठी भारत माता
सर उठा रहा भुजंग हैक्रोध, रोष, दंभ हैबेबस है लाल भूमि केशत्रु हो रहा दबंग हैफलफूल रहा आतंक हैऔर सो रहा मनुष्य हैअपनी ही माँ की छाती परवो उडेल रहा रक्त हैजिन चक्षु में था नेह भरावो पीडा से आज बंद हैंमाँ कहे मुझे नहीं देखनामेरी कोख पर लगा कलंक हैनादान...
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shikha varshney
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[26 Jan 2010 04:54 AM]



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