रौशनी का प्रतिनिधि

Kuchh kahi kuchh unkahi मुझे - यानि सिर्फ मुझे - एक अँधेरे ने जकड़ रक्खा है ,अपने मजबूत हाथों में पकड़ रक्खा है।वे जानते हैं की मैं समरथ हूँ - सूरज अपनी हथेली पर उगा सकता हूँ,और, धुप की चाशनी में खुद को पका सकता हूँ।वो ये भी जानते हैं कि ,जिस दिन सूरज कि खेती शुरू हो जाएगी,उस दिन... [पूरी पोस्ट]
writer Nihar Khan
views
11
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[26 Jan 2010 03:22 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix