रौशनी का प्रतिनिधि
मुझे - यानि सिर्फ मुझे - एक अँधेरे ने जकड़ रक्खा है ,अपने मजबूत हाथों में पकड़ रक्खा है।वे जानते हैं की मैं समरथ हूँ - सूरज अपनी हथेली पर उगा सकता हूँ,और, धुप की चाशनी में खुद को पका सकता हूँ।वो ये भी जानते हैं कि ,जिस दिन सूरज कि खेती शुरू हो जाएगी,उस दिन...
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Nihar Khan
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[26 Jan 2010 03:22 AM]



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