वीर शहीद- कविता
"साख से टूट जायें वो पत्ते नहीं हैं हम ,आंधियों से कह दो कि औकात में रहा करे।।"गर्व है उन पर राष्ट्र को, जो आज प्राप्ति हैं वीरगति को, गूंजती है तालियां नाम पर उनके, आखें छलकती हैं साहस पर उनके।क्या जोश था इन वीरों का ? जो सामने से ये लड़े, न खौफ था मौत...
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neeshoo
कविता
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[26 Jan 2010 02:21 AM]



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