गणतंत्रोत्सवः एक मंत्र कविता
इस गणतन्त्र मेंगण के तन्त्र को नमस्कार हैतन्त्र की शक्तिगण की भक्तिविकास की तख्ती मेंचढ़े हुए रंगों को नमस्कार हैइस व्यवस्था, तन्त्र मेंलोकसभा मेंउखाड़े गये माईक औरकुर्सियों को नमस्कार हैविधानसभा पटल पररखे गये रिश्वत के नोटों को नमस्कार हैहर पाँच साल...
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सुरेश पण्डा
कविता
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[25 Jan 2010 22:10 PM]



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