गणतंत्र दिवस पर शाहिद मिर्ज़ा ‘शाहिद’ की ग़ज़ल
गणतंत्र दिवस पर “महावीर” और “मंथन” की ओर से
शुभ कामनाएं भारत से पत्रकार शाहिद मिर्ज़ा ‘शाहिद’ की ग़ज़ल जश्ने-जम्हूरी हमें यूं भी मनाना चाहिये
क़ौमी यकजहती का इक सूरज उगाना चाहिये
दर्द तेरे ज़ख्म का उभरे मेरे दिल में...
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महावीर
ग़ज़ल/नज़्मशाहिद मिर्ज़ा 'शाहिद'
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[25 Jan 2010 18:01 PM]



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