प्रीति रूपांतरकारी रसायन

ओशो चिन्‍तन एक तत्व हमारे भीतर है, जिसको प्रीति कहें। यह जो तत्व हमारे भीतर है-प्रीति, इसी के आधार पर हम जीते हैं। चाहे हम गलत ही जीएं, तो भी हमारा आधार प्रीति ही होता है। कोई आदमी धन कमाने में लगा है; धन तो ऊपर की बात है, भीतर तो प्रीति से ही जी रहा है--धन से उसकी... [पूरी पोस्ट]
writer राजेंद्र त्‍यागी

चिन्‍तन

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[25 Jan 2010 17:30 PM]

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