कैथरीन विलियम्स की एक कविता

नई रोशनी जितना मुझे याद है उससे ज्यादा भूल चुकी हूँएक बिखरे अतीत कीअनजान कहानियों में खुद को खोजती हुई।विस्थापन,ताकत के दुरुपयोग और सरोकारविहीनता केधुंधलके में खोई जिंदगी के बीचपैंतालीस वर्ष बाद,फिर मैं जीवित हुई-अंधकार से निकल रोशनी के लिए(प्रस्तुति -सुधा सिंह)... [पूरी पोस्ट]
writer sudha singh

स्त्री अस्मिता

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[29 Nov 2009 07:09 AM]

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