आदमी आदमी से मिलता है

एक नई शुरुआत आदमी आदमी से मिलता है , जाने कौन क्या निकलता है .माथे की सिलवट पढ़ भी ले नयनों की भाषा समझ भी ले जो बात हों चहरे वालीउसका भला कोई क्या करले जो गिरगिट से रंग बदलता हैभाव की कीमत जाने कौन अपना पराया माने कौनकहते हैं दिल तो पागल... [पूरी पोस्ट]
writer jagdeep singh
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[15 Dec 2009 11:27 AM]

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