मुश्किलें
मुश्किलें हर तरफ हैं मुश्किलें पहाड़ सी छाती पे रखा है पत्थर बहुत भारी उजाला नहीं आता नज़र मेरे भीतर की खोह में झाँक नहीं पाया मैं वह अँधेरी रहस्यमयी गुफा सी लगती हैआदि और अंत भी होता है गुफा की तरह...
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jagdeep singh
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[19 Dec 2009 06:14 AM]



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