संजीव सलिल की रचनाएँ
गणतंत्र दिवस पर विशेष गीत: सारा का सारा हिंदी हैआचार्य संजीव 'सलिल'* जो कुछ भी इस देश में है, सारा का सारा हिंदी है. हर हिंदी भारत माँ के माथे की उज्जवल बिंदी है.... मणिपुरी, कथकली, भरतनाट्यम, कुचपुडी, गरबा अपना है. लेजिम, भंगड़ा, राई, डांडिया हर नूपुर का...
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आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
contemporary hindi poetry
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[25 Jan 2010 13:20 PM]



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